कृपया ध्यान दें- भोजपुरी वर्णमाला विशेषकर हिंदी के समान ही है।
स्वर एवं उसकी मात्रा– अ, आ (ा), इ (ि), ई (ी), उ (ु), ऊ (ू), ए (े), ऐ (ै), ओ (ो), औ (ौ), अं (ं)
नोट :- 1. हिंदी के आधार पर देखें तो भोजपुरी में अधिकांश शब्दों में ै, ो इन स्वर चिन्हों के स्थान पर इन (ै के लिए ‘इ’ एवं ो के लिए ‘उ’) स्वरों का ही प्रयोग होता है अगर ये स्वर चिन्ह (ै, ो) उस शब्द के एकदम अंतवाले व्यंजन पर न लगे हों। जैसे- जइसे, पइसा, कइसा, जइसा, चउका, मउसा, मउसी (हिंदी- जैसे, पैसा, कैसा, जैसा, चौका मौसा, मौसी)
2. ृ (ऋ) के लिए रि का प्रयोग होता है। जैसे- कृपया, ऋतु (हिंदी- किरपया, रितु)
व्यंजन- क, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट, ठ, ड, ढ, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, स, ह, त्र (तिर्)
3. भोजपुरी में विशेषकर क्ष के लिए छ, ष के लिए ख या स, त्र के लिए तिर, ज्ञ के लिए ग्य का प्रयोग होता है और हाँ ण के लिए न ही आता है। पर एक बात याद रखें संस्कृतनिष्ठ शब्दों कभी-कभी बिना बदलाव के लिखा जाता है और उसमें क्ष, त्र, ज्ञ आदि अपने मूल रूप में आ जाते हैं।
कुछ उदाहरण देखें-
1.ग्यानी, छमा, तिरसूल, पुरान (हिंदी- ज्ञानी, क्षमा, त्रिशूल, पुराण)
2. खटकोन, कोस (हिंदी- षटकोण, कोष या कोश)
नोट- भोजपुरी में क़, ख़, ज़, फ़ जैसे अरबी वर्णों का प्रयोग नहीं होता।
-प्रभाकर पाण्डेय


