ज्योतिष वेदांग है और यह कभी गलत हो ही नहीं सकता। हाँ अगर ज्योतिष के आधार पर कोई गणना की जाए और गणना करनेवाला सही गणना ना करे तो इसमें ज्योतिष या ऐसी ही अन्य विद्याओं का क्या दोष।
आइए, मैं आपलोगों को एक सच्ची घटना सुनाता हूँ जिससे यह सिद्ध हो जाएगा कि ज्योतिष कभी गलत नहीं होता।
हमारे क्षेत्र में एक माने-जाने पंडित थे, नाम था उनका बसावन पंडित। बसावन पंडीजी की गणनाएँ कभी गलत नहीं होती थीं। उनकी गणना का लोहा बड़े-बड़े विद्वान भी मानते थे।
एक बार सुबह-सुबह नहान-ध्यान के बाद बसावन पंडीजी पंचांग देख रहे थे। अचानक उन्होंने अपने घरवालों को अपने पास बुलाया और कहा कि गणना के आधार पर आज सूर्यास्त से पहले उनकी एक आँख फूट जाएगी। घरवाले चिंता में पड़ गए और उस दिन उन्हें घर से बाहर न निकलने की प्रार्थना किए। बसावन पंडीजी पूजावाली कोठरी में बैठकर धर्मग्रंथों का अध्ययन करने लगे। कई लोग उनसे मिलने के लिए आए पर यह कह कर कि आज वे किसी से नहीं मिलेंगे, उन लोगों को वापस कर दिया गया।
बसावन पंडीजी रात होने की राह देखते रहे। अचानक सूर्यास्त के समय पता नहीं उनको क्या सूझी कि वे लोटा में पानी लेकर डोलडाल (दिशा मैदान) के लिए घर से बाहर निकल आए। अब वे निश्चिंत थे क्योंकि सूर्यदेव भी डूबने को थे। वे घर के बाहर की पगडंडी पकड़कर खेतों की ओर जाने लगे। उसी पगडंडी से होकर उनके ही गाँव का एक आदमी रहेठे (अरहर के डंडे) का बोझा सर पर लेकर गाँव में आ रहा था। जब वह पंडीजी को देखा तो रास्ते से थोड़ा किनारे खड़ा हो गया कि पंडीजी को कोई परेशानी न हो। पंडीजी जब उस आदमी को पार कर रहे थे तभी अचानक वह आदमी यह देखने के लिए मुड़ा कि पंडीजी चले गए क्या? और तभी अरहर के एक डंडे से उनकी आँख खुदकर फूट गई। वह आदमी बहुत परेशान हो गया। पंडीजी ने उससे कहा कि परेशान होने की कोई बात नहीं हैं। यह होने ही वाला था । तुम मुझे मेरे घर पहुँचा दो।
देखा आपने ज्योतिष या ऐसी ही विद्याएँ सर्वदा सही हैं पर उनका सही ज्ञान होना आवश्यक है।
-प्रभाकर पाण्डेय
11 मई, 2008
ज्योतिष कभी गलत नहीं होता (सत्य कथा)
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प्रभाकर पाण्डेय
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20 अप्रैल, 2008
शब्द विचार : अन्तर्राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय
शब्द को ब्रह्म की संज्ञा दी गई है। जब शब्द स्वयं भगवान है तो वह गलत कैसे हो सकता है। हाँ गलती वहाँ होती है जब हम शब्दों (पदों) का प्रयोग गलत अर्थ में करते हैं। यहाँ शब्द की बात हो रही है न कि अशब्द की। यह इसलिए स्पष्ट कर रहा हूँ कि कुछ विद्वान अशब्द सृजित कर बोलते हैं कि यह भी शब्द है। हाँ गुरुजी वह आपके लिए शब्द ही है। कुछ लोग राक्षस की पूजा करें और उनको ही भगवान माने तो यह उनकी मर्जी।
अब आइए दो शब्दों अन्तर्राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय के महत्त्व को उनके अर्थों में अंगीकार कर लिया जाए।
अन्तर्राष्ट्रीय में अन्तर् है जिसका अर्थ होता है अन्दर का, भीतरी या भीतर से संबंधित। जैसे- अंतर्गृह एवं अंतर्द्वन्द्व।
'अन्तर्देशीय पत्र' में भी यही 'अंतर्' है जिसके आधार पर 'अन्तर्देशीय पत्र' का अर्थ हो जाता है; देश के अंदर चलनेवाला पत्र। तो इस आधार पर अन्तर्राष्ट्रीय = अन्तर्देशीय। अन्तर् से बने कुछ अन्य शब्द हैं- अन्तर्राज्यीय, अन्तर्प्रदेशीय आदि। यानि अन्तर्राज्यीय बसअड्डे से आप को उस राज्य के अन्दर ही किसी स्थान पर जाने के लिए बस मिलेगी। अन्तर्राज्यीय प्रतियोगिता में उस प्रदेश की ही यानि मंडल स्तर की या जनपद स्तर आदि की टीमें हिस्सा लेती हैं।
अब 'अन्तरराष्ट्रीय' के अर्थ को समझा जाए। 'अन्तरराष्ट्रीय' में 'अन्तर' है जिसका अर्थ होता है; बाहरी, दूर का या बाहर से संबंधित या असमानता। जैसे- राम एवं श्याम के कार्यालय में बहुत अंतर है। इस वाक्य के दो अर्थ हो सकते हैं । 1. हो सकता है कि एक दूसरे के कार्यालय में विपरीत विशेषताएँ हों। यानि एक का छोटा या अच्छा हो तो दूसरे का बड़ा या बुरा हो। 2. हो सकता है कि एक दूसरे के कार्यालय एक दूसरे से काफी दूरी पर स्थित हों।
हाँ तो अब मुद्दे पर आ जाते हैं। 'अन्तरराष्ट्रीय' में 'दूरी का या दूर से संबंधित' का विशेष अर्थ है। यही 'अन्तर' 'देशान्तर' में भी है। 'देशान्तर' यानि दूसरा देश (परदेश)। यानि अंतर का अर्थ हुआ 'दूसरा या दूसरे से संबंधित'।
स्पष्ट हो गया 'अन्तरराष्ट्रीय' माने एक से अधिक राष्ट्रों से संबंधित।
एक उदाहरण और लीजिए,"गुस्सा तब आता है जब अमेरीका (अमरीका) अन्तरराष्ट्रीय ही नहीं अपितु किसी दूसरे राष्ट्र के अन्तर्राष्ट्रीय मामलों (किसी राष्ट्र के व्यक्तिगत मामले) में भी हस्तक्षेप करना शुरु कर देता है।"
-प्रभाकर पाण्डेय
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प्रभाकर पाण्डेय
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19 अप्रैल, 2008
भोजपुरी लोककथा : चालीस में चार कम हजाम, पंडीजी सलाम
आपलोग तो जानते ही हैं कि हजामलोग कितने छत्तीसा (चालीस में चार कम) होते हैं। शादी-विवाह, यज्ञ-प्रयोजन आदि में हजाम या हजामिन हमेशा पंडितों को दबा के रखते हैं। बिना हजाम या हजामिन के इन धार्मिक या सामाजिक आयोजनों का मजा किरकिरा हो जाता है। ग्रामीण जनता की नजर में हजाम चालीस में चार कम ही होते हैं यानि छत्तीसा। चलिए आप लोगों को एक कहानी सुनाता हूँ जिससे कहानी का शीर्षक अपने आप चरितार्थ हो जाएगा।
एक हजाम अपने गन्ने के खेत की रखवाली कर रहा था। तभी उसी के गाँव के एक पंडीजी, एक बाबूसाहब (ठाकुर, क्षत्रिय), एक हजाम और एक यादवजी (अहिर, ग्वाला) उसके खेत से धड़ाधड़ गन्ने तोड़ लिए। हजाम बेचारा अकेले था और ये लोग थे चार। वह इन चारों से कैसे निपटे ? बहुत सोचने-विचारने के बाद वह इन चारों के पास पहुँचा और पंडीजी व बाबूसाहब को सलाम दागने के बाद यादवजी से पूछा, “क्यों रे अहिरकट! तूमने मेरे खेत से गन्ना क्यों तोड़ा? (पंडीजी की ओर इशारा करते हुए) ये तो पंडीजी हैं। कथा-पोथी बाँचते हैं। (बाबूसाहब की ओर इशारा करते हुए) ये तो बाबूसाहब हैं, गाँव के बड़कवा हैं और हमलोंगो के रक्षक भी और (हजाम की ओर इशारा करते हुए) ये हमारे बिरादर (जाति-भाई) हैं। ये भी गन्ना तोड़ सकते हैं पर तूने क्यों तोड़ा?” इतनी बात सुनने के बाद पंडीजी, बाबूसाहब और हजाम तीनों हँसने लगे और हजाम (खेतहवा) यादवजी को खूब धोया। बेचारे यादवजी रोते-गिड़गिड़ाते अपना रास्ता नाप लिए। यादवजी के जाने के बाद वह हजाम से पूछा, “(पंडीजी और बाबूसाहब की ओर इशारा करते हुए) ये लोग तो गाँव के बड़कवा हैं। समय आने पर हमारी मदद भी कर सकते हैं। लेकिन तूँ मेरा जाति-भाई होकर मेरे ही खेत में से गन्ना तोड़ा।” इतना कहने के बाद उसने हजाम भाई की भी अच्छी तरह से सेवा की। हजाम भाई भी अपना रास्ता ले लिए। हजाम के जाने के बाद वह बाबूसाहब से बोला, “(पंडीजी की ओर इशारा करते हुए) ये तो पंडीजी हैं। हमारा और इनका नाता जनम-जनम का है। इनको दुनिया सलाम करती है। भगवान खुद ही ब्राह्मण की महत्ता को बताए हैं। ये एक नहीं हजार गन्ना तोड़ सकते हैं पर आपने क्यों तोड़ा? आप बाबूसाहब हैं इसका मतलब यह तो नहीं कि आप किसी का घर भी उजाड़ देंगे।” इतना कहने के बाद उसने बाबूसाहब की शरीर (बाल नहीं) भी अच्छी तरह से बनाई। मार खाने के बाद बाबूसाहब भी अपने रास्ते चले गए। अब बारी पंडीजी की थी। अब हजाम पंडीजी की ओर मुड़ा ओर बोला, “आप पंडित हैं। कहाँ तक सबको अच्छी बुद्धि सिखाएँगे तो उल्टे दूसरे के खेत में से गन्ना तुड़वा रहे हैं। दुनिया आपके पैर की पूजा करती हैं; पीठ की नहीं।” इतना कहने के बाद आप तो समझ ही गए होंगे कि पंडीजी के साथ क्या हुआ।
शायद अब आपलोग चालीस में चार कम का मतलब समझ गए होंगे।
-प्रभाकर पाण्डेय
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प्रभाकर पाण्डेय
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24 जनवरी, 2008
आदमी एक रूप अनेक (धन्य हो लीलाधारी)
आइए, आपको आदमी से परिचित कराता हूँ। मैं भी आदमी हूँ और आप भी आदमी हैं फिर भी आदमी के बारे में बताता हूँ। आदमी ने आदमी की उत्पत्ति अरबी के शब्द आदम से बताया है और आदमी का प्रयोग बाबा आदम के जमाने से करता आया है।
वही आदमी (व्यक्ति, मानव) कभी आदमी (मर्द, पुरुष, नर) और औरत में फर्क बताता है और वही आदमी शादी के बाद अपनी पत्नी का आदमी (पति, मर्द, शौहर, खसम, नाथ, कांत) बन जाता है। वही आदमी कभी सेठ, अधिकारी बनकर आदमियों (कर्मचारी, कामगार, कामदार) से काम कराता है और वही आदमी कभी मालिक बनकर अपने आदमी (नौकर, सेवक, दास) से जूठा भी मँजवाता है। वही आदमी खुद ही आदमी (सभ्य, सुशील) नहीं बनता ना दूसरे आदमी को आदमी (सभ्य, सुशील) बनाता है और अपनी आदमियत (आदमीयत भी) को भूलकर आदमखोर भी बन जाता है।
आदमी आदमी से अत्यधिक ईर्ष्या रखता है इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि आदमी किसी उपसर्ग या प्रत्यय (हीन, पूर्ण, सु, कु इत्यादि) को आदमी के पास भटकने भी नहीं देता है, जिसके कारण आज भी शब्दकोश में आदमी के बाद केवल आदमियत ही दिखता है, आदमी से कोई और शब्द नहीं बनता है।
ईश्वर ने आदमी को आदमियत के लिए बनाया है, इस बात को समझिए और ऊँच-नीच, घृणा आदि का त्यागकर आपस में प्रेम-भाव से रहिए (इसी में आदमी की भलाई है)।
-प्रभाकर पाण्डेय
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प्रभाकर पाण्डेय
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20 जनवरी, 2008
काल (Tense) : तुलनात्मक एवं अनुवादात्मक अध्ययन-6 (हिंदी, भोजपुरी एवं अंग्रेजी)
भूत काल (Past Tense):
वह काल जो भूत (बिता हुआ समय) का बोध कराए।
(ख) अपूर्ण भूत काल या सतत भूत काल
(Past Continuous / Imperfect Tense)
| हिन्दी | भोजपुरी | अंग्रेजी |
| 1.वह जा रहा था। | उ जात रहे। (छोटों के लिए) उ जात रहने। (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | He was going. |
| 2.तुम जा रहे थे। | तू / तूँ जात रहल S । | You were going. |
| 3.आप जा रहे थे। (आदरार्थ) | रउआँ जात रहनी। | You were going. |
| 4.वह जा रही थी। | उ जाति रहे। (छोटों के लिए) उ जात रहली। (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | She was Going. |
| 5.लड़का जा रहा था। | लइका / लइकवा जात रहे । | The boy was going. |
| 6. (क) वे जा रहे थे। (एकवचन-आदरार्थ) (ख) वे जा रहे थे। (बहुवचन) | (क) उहाँका जात रहनी। (ख) उ सब जात रहे। | (क) He was going. (ख) They were going. |
| 7. वह नहीं जा रहा था। (नकारात्मक) | उ नाहीं जात रहे । (छोटों के लिए) उ नाहीं जात रहने । (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | He was not going. |
| 8.वह नहीं जा रही थी। | उ नाहीं जाति रहे । (छोटों के लिए) उ नाहीं जात रहली। (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | She was not going. |
| 9.आप लोग नहीं जा रहे थे। | रउआँ सब नाहीं जात रहनी। | You were not going. |
| 10.क्या वह वह जा रहा था ? | का उ जात रहे / का उ जात रहने ? | Was he going? |
| 11.वह कब जा रही थी ? | उ कब जाति रहे ? (छोटों के लिए) उ कब जात रहली ? (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | When was she going? |
| 12.आप कहाँ जा रहे थे ? | रउआँ काहाँ / कहाँ / कहवाँ जात रहनी ? | Where were you going? |
अपूर्ण भूत काल की पहचान-
भूत में कार्य के जारी रहने का बोध होता है।
(हिन्दी) वाक्य के अंत में रहा, रही, रहे के साथ था,थे,थी आता है।
(कुछ वाक्य हुआ था, हुई थी, हुए थे पर भी समाप्त होते हैं)
(भोजपुरी) वाक्य के अंत में रहे, रहने, रहल S, रहनी, रहली आदि आता है।
कभी-कभी वाक्य के अंत में केवल रहा, रही, रहे ही आता है। जैसे— उ बइठल रहे। (वह बैठा हुआ था।) –ध्यान दें— इस वाक्य में भी भूतकाल में बैठने का काम जारी था।
नियम:- (हिंदी या भोजपुरी का अंग्रेजी में अनुवाद करते समय)
- एकवचन कर्ता और के साथ was और मुख्य-क्रिया में ‘ing’ का प्रयोग करते हैं।
- बहुवचन कर्ता के साथ were और मुख्य-क्रिया में ‘ing’ का प्रयोग करते हैं।
- नाकारात्मक वाक्यों में ‘was, were’ के बाद not को रखते हैं।
- प्रश्नवाचक के लिए अगर वाक्य क्या (हिन्दी) या का (भोजपुरी) से शुरु होता है तो एकवचन कर्ता के पहले ‘was’ एवं बहुवचन कर्ता के पहले ‘were’ लगाते हैं।
- प्रश्नवाचक शब्दों (कौन-कवन-Who, कब-कब-When, कहाँ- काहाँ/कहाँ/कहवाँ-Where आदि) को ‘was, were’ से भी पहले लगाते हैं।
- ध्यान दें--- यदि क्या (हिन्दी) या का (भोजपुरी) वाक्य के शुरु में न आकर कहीं और आए तो ‘was, were’ से भी पहले ‘What’ लगाते हैं।
- यदि वाक्य प्रश्नसूचक और नाकारात्मक दोनों हो तो ‘not’ को कर्ता के बाद लगाते हैं।
क्रमशः......
प्रभाकर पाण्डेय
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प्रभाकर पाण्डेय
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19 जनवरी, 2008
चजइ काल (Tense) : तुलनात्मक एवं अनुवादात्मक अध्ययन-5 (हिंदी, भोजपुरी एवं अंग्रेजी)
भूत काल (Past Tense):
वह काल जो भूत (बिता हुआ समय) का बोध कराए।
(क) सामान्य भूत काल या अनिश्चित भूत काल
(Past Indefinite Tense)
| हिन्दी | भोजपुरी | अंग्रेजी |
| 1.वह गया। | उ गइल। (छोटों के लिए) उ गइने। (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | He went. |
| 2. मैं गया। | हम गइनी। | I went. |
| 3.तुम गए थे। | तू / तूँ गइल रहल S। | You went. |
| 4.आप गए थे। (आदरार्थ) | रउआँ गइल रहनी। | You went. |
| 5.वह गयी थी। | उ गइल रहे। (छोटों के लिए) उ गइल रहली। (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | She went. |
| 6.लड़का गया। | लइका गइल / लइकवा गइल । | The boy went. |
| 7.(क) वे गए। (एकवचन-आदरार्थ) (ख) वे गए। (बहुवचन) | (क) उहाँका गइनी। (ख) उ सब गइल। | (क) He went. (ख) They went. |
| 8.हमलोग गए थे। | हमनीजान गइल रहनी (के)। | We went. |
| 9. वह नहीं गया। (नकारात्मक) | उ नइखे गइल। (छोटों के लिए) उ नइखन गइल। (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | He did not go. |
| 10.वह नहीं गई। | उ नइखे गइली। (छोटों के लिए) उ नइखी गइल। (बराबरवालों या थोड़ी इज्जत के साथ) | She did not go. |
| 11.आप लोग नहीं गए। | रउआँ सब नइखीं गइल। | You did not go. |
| 12.क्या वह गया ? | का उ गइल ? | Did he go? |
| 13.वह कब गई ? | उ कब गइलि ? (छोटों के लिए) |