कुछ विशिष्ट दिनों में विशिष्ट दिशाओं में काल का वास, जो यात्रा के लिए अशुभ माना जाता है.
1.अतवार, शुक जे पछिम जाये, हानी होखे अउरी लाभो न पावे.
(शुक्र और रविवार को पश्चिम की ओर यात्रा करना वर्जित है)
2.सोम शनीच्चर पूरब न चालू, मंगर बूध उतर दिशकालू.
(सोमवार,शनिवार को पूरब और मंगलवार,बुद्धवार को उत्तर
की ओर यात्रा करना वर्जित है )
3.जो बीअफ्फे दखिन करे पयाना, ताको समझो घर नहीं आना.
(बृहस्पतिवार को दक्षिण की ओर यात्रा करना वर्जित है)
२१-०९-२००६
दिशासूल (दिक्शूल) (गँवई कहिन-श्रुत)
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1 टिप्पणी:
प्रभाकर जी, आप के जिले की भाषा की लय बहुत सुंदर है लगता है कि कोई कविता पढ़ रहा हो. मेरे विचार में अगर आप शब्दों का शाब्दिक अनुवाद करें, जैसे इधर जाने से हानि होगी, उधर जाने से घर वापस नहीं लौटोगे आदि, तो पढ़ने में अधिक आनंद आयेगा.
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