प्यारी दीपावली आ रही
चारों तरफ हो रही सफाईदेखो गंदगी भाग रही ।
हम सब हैं भारतवासी
घर-घर में दीप जलाएँगे
सत्य की जय होती असत्य पर
यह गीत प्रेम से गाएँगे ।
आए थे प्रभु सीताराम
दुष्टों का मर्दन कर जब
पुरी अयोध्या में दीप जला
प्रेम के आँसू बहा रहे सब ।
उसी परम्परा को निभाते
आज भी हम भारतवासी
"सत्यमेव जयते" गूँजा है सदा
चन्द्र, सूर्य हैं इसके साक्षी ।
क्या ? हम करते सम्मान
आज प्रभु सीताराम का
चारों तरफ है अंधकार
क्या होगा देश के मान का ?
चारों तरफ है लूट-खसोट
हत्या,जातिवाद का बोलबोला
ना मनाएँ हम झूठी दीवाली
ना जपें दिखावटी का माला ।
क्या हो गया हम भारतीयों को
जाना था प्रेम,सत्य की डगर
रो रही फूट-फूटकर भारत माँ
पूतों ने ही बरपाया कहर ।
कितनी है शर्म की बात
देश के पथप्रदर्शक कटघरे में
आज हो गया मेरा राष्ट्र ऐसा
जहाँ दीप न जलता कई घरों में ।
हम मनाते हर्षोल्लास दीवाली
लाखों-लाखों दीप जलाते
हींकभर बढ़िया भोजन करते
कुछ अपने भाई भूखों सो जाते ।
क्या रामराज्य सपना
हम साकार कर पाएँगे
'मेरा भारत महान'
एक साथ गा पाएँगे ?
दिल से मनानी है दीवाली
तो हर घर को रोशन करना होगा
ये है मेरा राष्ट्र सब अपने भाई
सोचकर,कोई कार्य करना होगा ।
दीवाली के इस शुभ अवसर पर
आइए, एक साथ खाएँ कसम
हर दिल में ज्योति जलाएँगे
प्रेम,एकता,सत्य का हम ।
जब पसरेगा प्रेम का उजाला
भागेगा घृणा,नफरत रूपी तम
प्रेम बंधन में सभी बँधेंगे
जातिवाद,क्षेत्रवाद होगा खतम ।
दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ ।
-प्रभाकर पाण्डेय





3 टिप्पणी:
very good.
अच्छी कविता.
बहुत अच्छी कविता ।
-लक्ष्मी कश्यप,
परियोजना भाषाविद्ध,आई.आई.टी.बाम्बे
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