"हिन्दुस्तान" नाम ही काफी है। जी हाँ हिन्दुस्तान दैनिक पर 25 जून बुधवार को "ब्लॉग वार्ता" नामक कालम में माननीय पत्रकार श्री रवीश कुमारजी ने "ब्लाग वार्ता : मैथिली और भोजपुरी के बबुआ" नाम से एक लेख लिखा। इसमें मेरे चिट्ठे "भोजपुर नगरिया" और मैथिली चिट्ठा "मिथिला मिहिर" के बारे में विस्तार से लिखा है। इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी पर एक मेरे घनिष्ठ मित्र माननीय विद्युतजी मौर्या ने मुझे ई-पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी।
रवीशजी लिखते हैं कि आपन बोली आपन पहिचान हS। इसी उद्घोष के साथ भोजपुरी भाषा के ब्लाक की धमक तब से है, जब से हिंदी में ब्लागकाल का उदय हुआ है। भोजपुरी के अलावा मैथिली में भी ब्लागावतार हो चुका है। आगे वे लिखते हैं कि क्लिक करते ही भोजपुर नगरिया का संसार खुल जाता है। इस ब्लाग के बबुआ प्रभाकर पाण्डेय देवरिया से लेकर कुशीनगर की कथाओं का जिक्र करते हैं। मुहावरों की भाषा रही है भोजपुरी। उनकी बहुत ही सटीक और सुंदर भाषा शैली एवं बेबाक लेखन ने इस लेख को जीवंत बना दिया है और भोजपुरी का एक आलोचनात्मक विवरण भी प्रस्तुत किया है।
कृपया इस लेख को पढ़ने के लिए आप 25 जून बुधवार का "हिन्दुस्तान" पढ़ सकते हैं।
मैं "भोजपुर नगरिया" की ओर से रवीश जी का और तमाम पाठक भाई-बहनों, काका-काकी, दादा-दादी का शुक्रगुजार हूँ और आशा करता हूँ कि भविष्य में भी आप सबका दुलार और आशिर्वाद इसी प्रकार मिलता रहेगा।
कोटि-कोटि प्रणाम रवीशजी और चिट्ठाकार समुदाय को।
भवदीय
-प्रभाकर पाण्डेय
03-07-2008
भोजपुर नगरिया "हिन्दुस्तान" दैनिक समाचार पत्र पर
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6 टिप्पणी:
परभाकरभइया, बधाई। शैलेस तिवारी बोलतानी।
बहुत बधाई और शुभकामनाऐं.
रउआ ई चर्चा आउर परसंसा के हकदार बानी. एक झोरा भरके बधाई. राउर खिस्सा-कहानी हम खूब रस लेके पढ़ीला, भोजपुरी में लिखे खातिर जौन खांटी भोजपुरिया संस्कार चाहीं ऊ रउवा लगे बा, हमनी के दिमाग में त सहरी कचरा फेंटा गइल बा. रुकीं मत, चलल चल जाईं...राह के माजा मंजिल में कहँवा बा...अबहीं त सुरूआत भइल बा.
आपको बहुत बहुत बधाई।
भोजपुर नगरिया की डगरिया पर चलते रहें, रुके नहीं।
भोजपुरी बानी हमें भी बहुत सुहाती है।
बधाई और शुभकामनाऐं.
बधाई...आगे बढ़ते रहिए.
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डा.चन्द्रकुमार जैन
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