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11-06-2010

हिंदी ब्लागिंग ये तेरा कैसा रूप....

हिंदी के सभी ब्लागरों को सादर नमन।।

बहुत दिनों के बाद आज हिंदी ब्लागिंग में झाँकने का मौका मिला शायद वह भी नहीं मिलता अगर मेरे एक मित्र ब्लागर हमें फोन पर नहीं बताते की महाराज आप अब तक सोंए हैं..सोएँ हैं तो जाग जाइए.....अरे जरा हिंदी ब्लागिंग की ओर अपनी दृष्टि तो घुमाइए...आजकल यहाँ बहुत मजेदार ड्रामा चल रहा है...रोनेवाला रो और हँसनेवाला हँस रहा है.....मैं सोचा कि जरा देख लूँ कि क्या हो रहा है और उनके द्वारा भेजे हुए दो-3 ब्लाग यूआरएल पढ़ गया और पढ़ने के बाद मुझे तो यही लगा कि जो भी हो रहा है वह अच्छा तो बिलकुल नहीं हो रहा है। ये तो हिंदी ब्लागिंग को रसातल की ओर ले जाया जा रहा है। क्या ब्लागिंग का मतलब गुटबाजी और टाँगखिचाई है। अरे समाज, देश, विदेश में इतना सारा कुछ हो रहा है...अच्छाई से लेकर बुराई तक..अगर जिसपर कलम चलाई जाए तो सदा चलती रहेगी। इन सब मुद्दों को छोड़कर बस एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए ब्लागिंग की शुरुवात हुई थी क्या। अगर ब्लागिंग की शुरुवात करनेवाला यह देख ले तो वह पागल ही हो जाएगा, क्या इसी के लिए उसने ब्लागिंग की शुरुवात की थी कि ब्लागर एक-दूसरे पर कीचड़ उछालें।
और तो और मुझे हँसी आ रही है इन जयचंदों पर जो मजा लेने और अपनी रोटी सेंकने के लिए कमेंट दे-देकर (कुछ लोगों के कमेंट सार्थक और साकारात्मक भी होते हैं...)  इस आग को और भड़का रहे हैं। भाई अपना हित तो सोंचो पर ऐसा हित सोंचो जो सदा बना रहे...आज उनकी तो कल उनकी जुबाँ को सही ठहरानेवालों क्या सही है उसी को सही ठहराओ...और हिंदी ब्लागिंग को डूबने से बचाओ। वैसे मुझे पता है कि आज की कथित ब्लागिंग डूबेगी नहीं...मेरा तो बस यह कहना है कि साकारात्मक सोचें और साकारात्मक लिखें।
ऐसी ब्लागिंग हो जो मनोरंजन के साथ ही साथ कुछ अच्छा दे जाए समाज को..कुछ मिले समाज को न कि एकदूसरे की टाँगखिंचाई हो और जगहँसाई हो।।

वरिष्ठ ब्लागरगण...सादर प्रणाम...अगर छोटों से कोई गलती हो तो उसे सुधारे न कि खुद छोटा बन जाएँ फिर आप काहे के वरिष्ठ....आप तो छोटे-से-छोटे की कटेगरी में आ जाएँगे।।
भाई लोगीं....विचार करें और हिंदी ब्लागिंग को एक सार्थक और साकारात्मक दिशा दें।। जय हिंदी ब्लागिंग, जय हिंद।।
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बरिष्ट ब्लागर सोनी जी का यह लेख पढ़े। और मेरे द्वारा इसपर की गई टिप्पणी।।
सोनीजी, सादर नमस्कार। आपका लेख पढ़ा, बहुत ही हँसी आई...क्या लिखते हैं आप। पर कभी आप एकांत में बैठकर चिंतन-मनन करें इस लेख...पर तो आपकी आत्मा शायद ही आपका साथ देगी। ऐसे पोस्ट हिंदी ब्लागिंग के लिए अभिशाप हैं। आप जैसे वरिष्ट लोग जिनको सबको साथ लेकर चलना चाहिए अगर वे ही ऐसा करें तो हिंदी ब्लागिंग का रसालत में जाना तय है। और अब मुझे हिंदी ब्लागिंग का असली चेहरा दिख रहा है। यहाँ साकारात्मक लेखन कम टाँग खिंचाई और गुटबाजी ज्यादे है। और ये भी पता है मेरे जैसे लोग जो किसी खेमे में जाना पसंद नहीं करते और इन खेमों को कलंक समझते हैं बस वे मन मसोसकर ही रह जाते हैं।
मुझे याद आ रहा है कि जब गाँव में एक कुत्ता भों भों करता था तो अन्य और भी बहुत से कुत्ते भों- भों करना शुरु कर देते थे।
आप की इस पोस्ट पर सभी ब्लागरों को चिंतन करना चाहिए खुद आपको भी..ताकि हिंदी ब्लागिंग गुटबाजी, टाँगखिचाईं से निकलकर साकारात्मकता की ओर आगे बढ़े।।
सादर धन्यवाद। अगर आपको मेरी इस टिप्पणी से ठेस पहुँची हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ पर मुझे बुरा-भला जो भी कहें पर मैं उनमें से नहीं जो गलत को भी सही कहकर अपनी रोटी सेंकते हैं...और मजे लुटते हैं, इनको क्या पता कि ये मजे एकदिन इनके लिए जंजाल बन जाएँगे.....
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हिंदी ब्लागिंग का कल्याण करनेवाले और उसका असली चेहरा दिखानेवाले कुछ और पोस्ट तो महान ब्लागरों द्वारा लिखे गए हैं-
1. आप तो ऐसे नहीं थे महराज.....
2. खैर आप भी तो कम नहीं...पर शायद गल्ती आप की नहीं...अगर जब बुजुर्ग ही ना समझें... बुजुर्ग = विद्वान।।


भाईजी...सादर प्रणाम...मुझे गाली देने से अच्छा है कि आप चिंतन-मनन करें और हिंदी ब्लागिंग को एक साकारात्मक दिशा दें।।। सादर धन्यवाद।।

- प्रभाकर पाण्डेय

17 टिप्पणी:

Jandunia ने कहा…

महत्वपूर्ण पोस्ट, साधुवाद

संजय भास्कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

प्रभाकर जी,

ये तो आपने मेरे ही मन की बात कह दी है, मैंने तो कब से इस बारे में हाथ जोड़ कर और सबसे अनुनय विनय कर रही हूँ कि सरस्वती माँ के दिए इस आशीष को समाज, मानव और देश के हित में प्रयोग करें. आपने जिस लेख को इंगित किया है - इस ब्लॉग्गिंग विधा में सोनी जी के भी दादा लोग बैठे हैं , जिनकी कलम ये तो सोचती ही नहीं है कि शब्द तो सब रचे गए हैं लेकिन उनके प्रयोग कि एक गरिमा होती है और स्थान होता है. कलम चलाकर गालियाँ भी लिखी जाती हैं और सन्देश भी. ये तो हमारी सोच को ही प्रदर्शित करता है. और उनका क्या कहें जो करतल ध्वनि से ऐसे लोगों का उत्साह बढ़ाने में नहीं चूकते . ब्लॉग्गिंग रसातल में कभी नहीं जायेगी. इतिहास इस बात का साक्षी है कि गलत कभी टिका नहीं है और सत्यम शिवम् सुन्दरम का अस्तित्व सदैव रहा है.
मैं आपके साथ इस तरह कि ब्लॉग्गिंग केर लिए विरोध दर्ज करती हूँ.

दिवाकर मणि ने कहा…

पांडेय जी, बात तो आपने बिल्कुल ही समसामयिक मुद्दे पर किया है। कहीं से भी किसी हिन्दी ब्लॉगर बंधुवर को (चाहे वो वरिष्ठ हों या कनिष्ठ) अपनी सकारात्मक रचनाधर्मिता छोड़कर एक-दूसरे के ऊपर कीचड़ उछालने का काम नहीं करना चाहिए। मुझे तो लगता है- आजकल हिंदी ब्लॉग-जगत पर शनि महाराज की अढ़ैया चल रही है, तभी तो एक के बाद एक छीछालेदर वाली पोस्टे आ रही हैं। पहले तो ज्ञानदत्त जी, अनुप शुक्ल और समीर लाल विवाद चला, जहां इन लोगों के बीच द्वंद्व कम था, अपितु इनके अनुयायियों मे घमासान मची थी। इस आभासी दुनिया में अनुयायी गण एक दूसरे को आभासी गालियां, जूते-चप्पल बांट रहे थे। अब ये दूसरा कांड.....पता नहीं क्या हो गया है, इन लोगों की बुद्धि को...
खैर, मैं अपनी बात कहता हूं। अपने कार्यालय में मैं अपने ब्लॉगिंग मोह के कारण बहुत ही बदनाम हो गया हूं। लेकिन अब लगता है कि अपना यह मोह काफी हद तक दूर करना होगा। वैसे भी मैं इन कुत्ते वाली आरोप-प्रत्यारोपात्मक पोस्टों को दूर से ही नमस्कार करता हूं। और मित्र होने के नाते आपको भी एक मशविरा है कि आप इस कीचड़ में अपने को ना ही घुसाइए....नहीं तो आपको भी किसी-ना-किसी खाके में फिट करके गरियाना शुरु कर दिया जाएगा।

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

दिवाकरजी,

किसी के गाली के डर से तो सत्य लिखना बंद नहीं किया जा सकता।। और हाँ बिना कीचड़ में घुसे कीचड़ की सफाई भी तो नहीं हो सकती।।

सादर।।

rashmi ravija ने कहा…

बहुत ही सार्थक चिंतन...मेरा भी आग्रह है...सार्थक लिखने का प्रयास करें...और व्यर्थ के विवादों से बचें

महाशक्ति ने कहा…

दिवाकर मणि जी और प्रभाकर भाई,
मेरा उद्देश्य कतई नही था कि मै किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाऊ किन्‍तु हाल म जिस प्रकार टांग खीच प्रर्दशन कुछ लोगो ने किया, उसका विरोध अवाश्‍यक था अन्‍यथा ये इनकी आदते बन जाती और ये अपना इसे बल समझते।

जय हिन्‍द

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

प्रभाकर जी विचारों की प्रभा तो फैलती रहनी चाहिए। जहां पर गलत विचार नजर आएं वहां पर छाता ओढ़ लेना चाहिए। मैं भी सबको यही समझा रहा हूं कि मॉडरेशन ऑन रखें और गलत सलत बेनामी टिप्‍पणियों को डिलीट करें।

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

महाशक्तिजी,
कहते हैं कि अपनी इज्जत अपने हाथ में होती है। जब ये बरिष्ठ और महान ब्लागर ही नहीं समझ पा रहे हैं तो आपका क्या दोष। आपके जगह पर कोई भी होता तो ऐसा ही करता। क्योंकि जब बात जोड़ने की नहीं तोड़ने की हो, साकारात्मक नहीं नाकारात्मक हो तो किसी को भी गुस्सा आएगा....और किसी भी ब्लागर सम्मेलन को कुत्तों के सम्मेलन से तुलना करना कहाँ की बहादुरी और अच्छी बात है। लगता है कि ब्लागर समुदाय ब्लागर न हो के भारतीय नेता (नेटा) हो गए हैं। राजनीतिक पार्टियाँ हैं। जो आए दिन एक दूसरे का स्वागत (दुरागत)करती रहती हैं।।


महाशक्ति ने कहा…
दिवाकर मणि जी और प्रभाकर भाई,
मेरा उद्देश्य कतई नही था कि मै किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाऊ किन्‍तु हाल म जिस प्रकार टांग खीच प्रर्दशन कुछ लोगो ने किया, उसका विरोध अवाश्‍यक था अन्‍यथा ये इनकी आदते बन जाती और ये अपना इसे बल समझते।

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

वाचस्पतिजी, सादर नमस्कार।

हाँ आप बिलकुल सही कह रहे हैं पर कुछ लोग अपने ही ब्लाग पर वेनामी टिप्पणियाँ करके किसी और के मथे मढ़े तो क्या किया जा सकता है।.....मुझे गलत, वेनामी टिप्पणियों से नहीं अपितु गलत, नाकारात्मक पोस्टों से शिकायत है।।

सादर।।



अविनाश वाचस्पति ने कहा…
प्रभाकर जी विचारों की प्रभा तो फैलती रहनी चाहिए। जहां पर गलत विचार नजर आएं वहां पर छाता ओढ़ लेना चाहिए। मैं भी सबको यही समझा रहा हूं कि मॉडरेशन ऑन रखें और गलत सलत बेनामी टिप्‍पणियों को डिलीट करें।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

व्यर्थ के विवादों से बचना चाहिए....सार्थक पोस्ट...

Suman ने कहा…

nice

राजीव तनेजा ने कहा…

आदरणीय प्रभाकर जी,नमस्कार ...
आपने जाने या अनजाने में मुझे महान ब्लॉगर की उपाधि दे दी जबकि मैं खुद को इस लायक नहीं समझता...
आपने कहा कि मैंने हिन्दी ब्लॉग्गिंग का कल्याण करने वाली तथा इसका असली चेहरा लोगों को दिखने वाली पोस्ट लिखी है| अगर मैं अपने इस कार्य या मकसद में रत्ती भर भी सफल हो पाया हूँ तो मैं इसके लिए खुद को गौरान्वित समझूंगा|
लेकिन यहाँ ऐसा लिखने का आपका मंतव्य शायद दूसरा था...खैर!..ये सब तो अपनी-अपनी सोच...अपना अपना नजरिया है...
इस समय ब्लोगजगत में जो कुछ चल रहा है ...उसी को मैंने अपनी लेखनी के जरिए एक कहानी का रूप दिया..हो सकता है कि आपको मेरी कहानी एक पक्षीय लगे लेकिन मेरा ज़मीर जानता है कि मैंने सच का साथ दिया है...इस बात की अगर आप तस्दीक करना चाहें तो पिछले लगभग एक महीने की इसी उठापटक से सम्बंधित पोस्टों को निष्पक्ष नज़रिए से एक बार फिर से खंगाल लें...अपने आप दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा ...फिलहाल इतना ही...बाकी फिर कभी...
विनीत:

राजीव तनेजा

राम त्यागी ने कहा…

I have to agree with you ...why to be part of a group ?

Udan Tashtari ने कहा…

चलो, इसकी एक सकारात्मक देन रही कि आप कुछ बोले तो वरना तो ऐसा मौन धरे हो कि कभी कभी डर सा लग जाता है. :)

गुड्डोदादी ने कहा…

प्रभाकर बेटा जी
चिएंजीव भवः
आपका लेख पढ़ा आपने लिखा भी बहुत अच्छा है
यही लिख सकती हूँ प्राचीन काल के सभी नारद मुनि पत्रकार बनना चाहते हैं
आशीर वाद आपकी माई गुड्डोदादी चिकागो से

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

सार्थक चिंतन और सार्थक चिंता! धन्यवाद!

 
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